पाठ-11 गृह प्रबन्ध
अभ्यास
1. बहुविकल्पीय
प्रश्न
सही विकल्प के सामने दिए गए गोल घेरे को काला करिए
उत्तर :
(अ) (iii) घर की वस्तुओं को व्यवस्थित कर उनमें कलात्मकता उत्पन्न करना।
(ब) (i) अनुरूपता, अनुपात, सन्तुलन, दवाव, लय ।
2. अति लघु उत्तरीय
प्रश्न
(क) बैटक की सजावट में कितनी शैलियाँ होती है? नाम लिखिए। उत्तर- वैटक की सजावट की दो शैलियाँ हैं
- भारतीय शैली- यह परम्परागत शैली है। बैठक में तख्त पर गद्दा और चादर बिछी होती है। तकिया या मसन्द होते हैं। एक छोटी मेज, एक-दो मूढ़ा रखे होते हैं। बैठक का फर्श कालीन, दरी या चटाई से ढका होता है। दरवाजे पर पायदान होता है। बैठक में टी०वी०, चित्र, लैंप व किताबों आदि को रखने के लिए उपयुक्त स्थान होते हैं।
- पाश्चात्य शैली- यह महँगी शैली है। कमरे में एक-दो सोफे रखे जाते हैं। टेबल, फूलदान, लैम्प, खिलौने आदि उपयुक्त स्थान पर होते हैं। फर्श पर दरी, कालीन बिछे होते हैं। दो-चार कुर्सियाँ होती हैं। बैठक में टी०वी०, म्यूजिक सिस्टम भी होता है।
(ख) बधाई पत्र किन-किन अवसरों पर दिए जाते हैं?
उत्तर : वधाई पत्र- विशेष अवसरों, त्योहारों, जन्मदिन, नए साल आदि पर भेजे जाते हैं।
3. लघु उत्तरीय
प्रश्न
(क) घर की सजावट से क्या लाभ है? किन्हीं चार बिन्दुओं को लिखिए।
उत्तर : घर की सजावट से हमें अनेक प्रकार के लाभ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मिलते हैं।
- घर की साज-सज्जा में वस्तुओं का एक व्यवस्थित क्रम होने से किसी भी वस्तु को ढूँढ़ने में अनावश्यक श्रम नहीं करना पड़ता है।
- सभी वस्तुएँ साफ-सुथरी व सुन्दर ढंग से व्यवस्थित होने के कारण अधिक दिन तक सुरक्षित रहती हैं।
- सुन्दर व सजा घर सभी को आकर्षित करता है।
- घर की सजावट उस घर में रहने वाले सदस्यों में स्वानुशासन की प्रवृति का विकास करती है।
(ख) यात्राओं की तैयारी के लिए हमें क्या ध्यान रखना चाहिए ?
उत्तर : यात्राओं की तैयारी के लिए हमें पूरी जानकारी प्राप्त करनी चाहिए। पहुँचने के रास्ते, साधन, ठण्डे-गरम कपड़ों , का चयन, रास्ते के लिए खाद्य सामग्री की व्यवस्था आदि। लम्बी यात्रा के लिए टिकट आदि की व्यवस्था भी कर लेनी चाहिए।
(ग) अपने दिक को अपने घर की सजावट के बारे में एक पत्र लिखिए।
उत्तर : विद्यार्थी स्वयं लिखें ।
4. दीर्घ उनीय
प्रश्न
(क) गृह सज्जा के प्रमुख नियम कौन-कौन से हैं? वर्णन करें।
उत्तर : गृह सज्जा के प्रमुख नियम निम्नलिखित हैं।
- अनुरूपता- सजी सामग्रियों में समानता दिखाई देना ही अनुरूपता है। रंगों, बनावट या आकार के आधार पर घर की सज्जा में अनुरूपता लाई जा सकती है।
- अनुपात- घर की सजी वस्तुओं के बीच रंग, आकार या बनावट के आधार पर एक निश्चित अनुपात हो।
- सन्तुलन- एक वस्तु को केन्द्र मानकर उसके चारों ओर विभिन्न वस्तुएँ रखकर आकर्षक प्रभाव उत्पन्न करने को सन्तुलन कहते हैं।
- दबाव (आकर्षण)- सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण वस्तु को केन्द्र में रखकर उसके चारों ओर कम महत्त्वपूर्ण वस्तु रखी जाती है।
- लय या क्रमायोजन- प्रत्येक वस्तु को उपयोगिता के आधार पर उचित स्थान पर रखना। इसका अभाव फूहड़पन को प्रदर्शित करता है।
(ख) गृह सज्जा के लिए उपयुक्त साधन क्या हैं? घर सजाने में इनकी क्या भूमिका है? उत्तर -गृह सज्जा के साधन
- फर्नीचर- मेज, कुर्सी, अलमारी, सोफा पलंग आदि फर्नीचर गृह सज्जा के प्रमुख साधन हैं। उन्हें समय-समय पर पोंछते, धोते व पॉलिश करते रहना चाहिए।
- कालीन/दरी-चटाई भी घर के फर्श की सज्जा करते हैं।
- पायदान- जूट व रबर से बने पायदानों का प्रयोग आज बहुतायत से हो रहा है।
- चित्र- पेंटिग- दीवारों को सुन्दर बनाने के लिए इनका प्रयोग किया जाता है।
- रंगोली- फर्श पर आकर्षक रंगों से रंगोली बनाई जाती है।
- परदे- घर की सज्जा में फर्नीचर के बाद परदों का प्रमुख स्थान है। दरवाजे, खिड़कियों पर लगे कल. त्मिक परदे घर की सुन्दरता बढ़ाते हैं।
- फूल-पौधे- घर में गमलों में लगे पौधे, फूलों के गुलदस्ते घर को सजाते हैं।
- बिजली-उपकरण- आजकल विद्युत चालित सामग्री से सजावट का चलन जोरों
- मनोरंजन के साधन-टेप, रेडियो, टी०वी० आदि घर की शोभा बढ़ाते हैं।
- पत्र-पत्रिकाएँ- पुस्तकें, दैनिक समाचार पत्र, पत्रिकाएँ ज्ञानवर्धन के साथ-साथ मेज पर सजावट के काम भी आते हैं।
(ग) सन्तुलन, लय एवं दबाव
उत्तर : सन्तुलन, लय और दबाव गृह सज्जा के नियम हैं, जिन्हें पहले ही वर्णित किया जा चुका है। प्रश्न 4 (क) का उत्तर देखें।
प्रोजेक्ट कार्य :
नोट : विद्यार्थी स्वयं करें।
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