UP Board Class 10 Social Science Geography | राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की जीवन रेखाएँ

By | April 23, 2021

UP Board Class 10 Social Science Geography | राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की जीवन रेखाएँ

UP Board Solutions for Class 10 Social Science Geography Chapter 7 राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की जीवन रेखाएँ

अध्याय 7.           राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की जीवन रेखाएँ
 
                           अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर
 
(क) एन०सी०ई० आर०टी० पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न
                                  बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1.(i) निम्न में से कौन-से दो दूरस्थ स्थित स्थान पूर्व-पश्चिमी गलियारे से जुड़े हैं?
(क) मुम्बई तथा नागपुर
(ख) सिलचर तथा पोरबंदर
(ग) मुम्बई और कोलकाता
(घ) नागपुर तथा सिलीगुड़ी
                                     उत्तर―(ख) सिलचर तथा पोरबंदर।
 
(ii) निम्नलिखित में से परिवहन का कौन-सा साधन वहनांतरण हानियों तथा देरी को
घटाता है?
(क) रेल-परिवहन
(ख) सड़क परिवहन
(ग) पाइपलाइन
(घ) जल परिवहन
                        उत्तर―(ग) पाइपलाइन।
 
(iii) निम्न में से कौन-सा राज्य हजीरा-विजयपुर-जगदीशपुर पाइपलाइन से नहीं जुड़ा
(क) मध्य प्रदेश
(ख) महाराष्ट्र
(ग) गुजरात
(घ) उत्तर प्रदेश
                    उत्तर―(ख) महाराष्ट्र।
 
(iv) इनमें से कौन-सा पत्तन पूर्वी तट पर स्थित है, जो अन्तःस्थलीय तथा अधिकतम गहराई
का पत्तन है तथा पूर्ण सुरक्षित है?
(क) चेन्नई 
(ख) पारादीप 
(ग) तूतीकोरिन 
(घ) विशाखापट्टनम
                          उत्तर―(ग) तूतीकोरिन।
 
(v) निम्न में से कौन-सा परिवहन-साधन भारत में प्रमुख साधन है?
(क) पाइपलाइन
(ख) रेल परिवहन
(ग) सड़क परिवहन
(घ) वायु परिवहन
                       उत्तर―(ख) रेल परिवहन।
 
(vi) निम्न में से कौन-सा शब्द दो या अधिक देशों के व्यापार को दर्शाता है?
(क) आन्तरिक व्यापार
(ख) अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार
(ग) बाहरी व्यापार
(घ) स्थानीय व्यापार
                           उत्तर―(ख) अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार।
 
प्रश्न 2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए-
(i) सड़क परिवहन के तीन गुण बताइए।
(ii) रेल परिवहन कहाँ पर अत्यधिक सुविधाजनक परिवहन साधन है तथा क्यों?
(iii) सीमांत सड़कों का महत्त्व बताइए।
(iv) ‘व्यापार’ से आप क्या समझते हैं? स्थानीय व अन्तराष्ट्रीय व्यापार में अन्तर स्पष्ट
कीजिए।
उत्तर―(i) भारत संसार के सर्वाधिक सड़क-जाल वाले देशों में से एक है। सड़क परिवहन के तीन
प्रमुख गुण अग्रलिखित हैं―
1. सड़क परिवहन; अन्य परिवहन के साधनों का उपयोग करते समय एक कड़ी के रूप में कार्य
करता है। उदाहरण के लिए― सड़कें; रेलवे स्टेशनों, हवाई-अड्डों और समुद्री-पत्तनों को
में जोड़ती हैं।
2. सड़कों के निर्माण में अन्य परिवहन के साधनों की तुलना में कम लागत आती है। इसके साथ ही
सड़कों को गैर-समतल भू-भागों पर भी बनाया जा सकता है।
3. इसके माध्यम से घरों तक की सेवाएँ सरलता से सुलभ हो जाती हैं। साथ ही सामान को चढ़ाने व
उतारने की लागत भी अपेक्षाकृत कम आती है।
(ii) हमारे देश में रेल परिवहन; वस्तुओं और यात्रियों को लाने-ले जाने का प्रमुख साधन है। रेल परिवहन
अनेक प्रकार के कार्यों में सहायक है; जैसे-व्यापार, पर्यटन, तीर्थ-यात्राएँ व लम्बी दूरी तक सामान का
परिवहन इत्यादि। भारत के उत्तरी मैदानों में रेल परिवहन विशेष रूप से अत्यधिक महत्त्वपूर्ण साधन है,
क्योंकि उत्तरी मैदान अपनी विस्तृत समतल भूमि, सघन जनसंख्या घनत्व, सम्पन्न कृषि व प्रचुर संसाधनों के
कारण रेल परिवहन के विकास में सहायक रहा है।
(iii) भारत के सीमांत क्षेत्रों में सड़कों के निर्माण आदि का कार्य सीमा-सड़क संगठन के द्वारा किया जाता
है। यह उत्तरी-पूर्वी क्षेत्रों में सामरिक महत्त्व की सड़कों का विकास करता है। इन सड़कों का महत्त्व इस
प्रकार है―
1. ये सड़कें सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों; विशेषकर चौकियों की रखवाली करने वाले
सैनिकों की प्रतिदिन की आवश्यकताओं को पूरा करने में बड़ी सहायक सिद्ध होती हैं।
2. युद्ध के समय इन्हीं सड़कों से फौजियों को लड़ाई का सामान, खाद्य-सामग्री व अन्य सहायता
पहुँचाई जाती है।
3. इन सड़कों से दुर्गम क्षेत्रों में आना-जाना सुगम हुआ है।
4. ये सड़कें इन क्षेत्रों के आर्थिक विकास में भी सहायक हुई हैं।
(iv) व्यापार का अर्थ―राज्यों व देशों के बीच विभिन्न वस्तुओं का आदान-प्रदान ‘व्यापार’ कहलाता है।
स्थानीय व अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में अन्तर―स्थानीय व अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में निम्नलिखित दृष्टियों से अन्तर है―
स्थानीय व्यापार―एक ही देश के अन्दर विभिन्न वस्तुओं का आदान-प्रदान ‘स्थानीय व्यापार’ कहलाता है।
स्थानीय व्यापार; गाँवों, कस्बों, शहरों तक ही सीमित होता है।
अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार―दो देशों के मध्य विभिन्न वस्तुओं का आदान-प्रदान ‘अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार’ कहलाता
है। यह व्यापार समुद्री, हवाई एवं स्थलीय मार्गों द्वारा हो सकता है। किसी देश के अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार की
प्रगति उसके आर्थिक विकास का सूचक है।
 
प्रश्न 3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 120 शब्दों में दीजिए―
(i) परिवहन तथा संचार के साधन किसी देश की जीवन-रेखा तथा अर्थव्यवस्था क्यों
कहे जाते हैं?
(ii) पिछले पन्द्रह वर्षों में अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार की बदलती प्रवृति पर एक लेख लिखिए।
उत्तर―(i) वस्तुओं, सेवाओं तथा लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाना ‘परिवहन’ कहलाता
है। यह परिवहन तीन महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में होता है-स्थल-मार्ग, जल-मार्ग एवं वायु-मार्ग। दूसरी तरफ संचार
के साधन वे साधन हैं, जिनका प्रयोग एक स्थान से दूसरे स्थान तक संदेश भेजने के लिए किया जाता है। इस
प्रकार ये दोनों ही किसी देश की ‘जीवन-रेखा’ कहे जाते हैं। इसके अग्रलिखित कारण हैं―
1. एक देश के विकास की गति; वस्तुओं एवं सेवाओं के उत्पादन के साथ उनके एक स्थान से
दूसरे स्थान तक परिवहन की सुविधा पर भी निर्भर करती है। इसीलिए सक्षम परिवहन के
साधन; तीव्र विकास हेतु पूर्व-अपेक्षित हैं।
2. भारत अपने विशाल आकार, अपनी विविधताओं तथा भाषाई, सामाजिक एवं सांस्कृतिक
बहुलताओं के उपरान्त भी संसार के सभी क्षेत्रों से सुचारु रूप से जुड़ा हुआ है। इसका प्रमुख कारण
देश के अच्छे परिवहन व संचार के साधनों की उपलब्धता ही है।
3. सक्षम एवं तीव्र गति वाले परिवहन के माध्यम से आज समस्त संसार एक बड़े गाँव में परिवर्तित हो
गया है। संसार का यह लघुरूप में परिवर्तित होना तथा परिवहन का इस सीमा तक विकास; संचार
के विभिन्न साधनों की सहायता से सम्भव हो सका है।
4. युद्ध के समय परिवहन एवं संचार के साधनों का महत्त्व और भी अधिक बढ़ जाता है। इनके
माध्यम से सम्पूर्ण देश सेनाओं की सहायता करने में सक्षम हो जाता है। युद्ध के मोर्चों पर हथियारों,
गोला-बारूद व रसद को पहुंचाने का काम सुगम हो जाता है।
वस्तुत: आधुनिक संचार एवं परिवहन के साधन; हमारे देश और इसकी आधुनिक अर्थव्यवस्था को
संचालित करते हैं। इसी कारण सघन एवं सक्षम परिवहन का जाल व संचार के साधन; आज स्थानीय, राष्ट्रीय
एवं अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार हेतु पूर्व-अपेक्षित हैं।
(ii) दो या दो से अधिक देशों के मध्य होने वाला व्यापार; ‘अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार’ कहलाता है। एक देश के
अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार की प्रगति; उसके आर्थिक विकास की सूचक है। इसी कारण इसे राष्ट्र का ‘आर्थिक
बैरोमीटर’ भी कहा जाता है। स्वाधीनता-प्राप्ति के उपरान्त हुए औद्योगिक विकास के परिणामस्वरूप भारत
के विदेशी व्यापार में भी प्रगति हुई है। अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में विगत 15 वर्षों में भारी परिवर्तन आया है।
वस्तुओं के आदान-प्रदान की तुलना में सूचनाओं, ज्ञान व प्रौद्योगिकी का आदान-प्रदान बढ़ा है। भारत
अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर सॉफ्टवेयर का एक बड़ा हब बन चुका है तथा सूचना-प्रोद्योगिकी के माध्यम से
अत्यधिक विदेशी मुद्रा अर्जित कर रहा है।
विश्व के समस्त भौगोलिक प्रदेशों तथा सभी व्यापारिक क्षेत्रों के साथ भारत के व्यापारिक सम्बन्ध हैं। पिछले
कुछ वर्षों से निर्यात के क्षेत्र में जिन वस्तुओं की वृद्धि हुई हैं, उनमें कृषि सम्बन्धी उत्पाद, खनिज एवं
अयस्क, रल व जवाहरात, रसायन व सम्बन्धित उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान तथा पेट्रोलियम उत्पाद इत्यादि।
भारत में आयात की जाने वाली वस्तुओं में पेट्रोलियम व पेट्रोलियम उत्पाद, मोती व बहुमूल्य रत्न,
अकार्बनिक रसायन, कोयला, कोक व कोयले का गोला तथा मशीनरी आदि सम्मिलित हैं। वर्तमान में भारी
वस्तुओं के आयात में 39.09 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
अभी हमें आयात की तुलना में निर्यात को और अधिक बढ़ाने की दिशा में प्रयास करने होंगे, जिससे
विश्व-बाजार में भारत अपना और अधिक वर्चस्व स्थापित कर सके।
 
प्रश्न-पहेली
1. उत्तरी-दक्षिणी गलियारे (Corridor) का उत्तरी छोर।
2. राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-2 का नाम।
3. दक्षिण रेलवे खंड का मुख्यालय।
4. 1.676 मीटर चौड़ाई वाले रेलमार्ग का नाम।
5. राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-7 का दक्षिणतम किनारा।
6. एक नदीय पत्तन।
7. उत्तरी भारत का व्यस्ततम रेलवे जंक्शन।
उत्तर―
1. उत्तरी-दक्षिणी गलियारे (Corridor) का उत्तरी छोर।
                                                                      ―श्रीनगर
 
2. राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-2 का नाम।
                                                 ―शेरशाह सूरी मार्ग
 
3. दक्षिण रेलवे खंड का मुख्यालय।
                                              ―सिकंदराबाद
 
4. 1.676 मीटर चौड़ाई वाले रेलमार्ग का नाम।
                                                             ―बड़ी लाइन
 
5. राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-7 का दक्षिणतम किनारा। 
                                                                    ―कन्याकुमारी
 
6. एक नदीय पत्तन।
                          ―कोलकाता
 
7. उत्तरी भारत का व्यस्ततम रेलवे जंक्शन।
                                                         ―मुगलसराय
 
                                          क्रियाकलाप
क्षैतिज, ऊर्ध्वाधर तथा विकर्ण रूप से शुरु करते हुए देश के विभिन्न गंतव्यों को चिहित कीजिए―
नोट―पहेली के उत्तर अंग्रेजी के शब्दों में हैं।
IMG_20210422_154526~2.jpg
उत्तर―
(i) SHERSHAH SURI MARG, (ii) SHRINAGAR, (iii) CHENNNAI
(iv) BROADGAUGE, (v) MUGHALSARAI, (vi) KOLKATA
(vii) KANYAKUMARI
नोट―उपर्युक्त उत्तरों को विद्यार्थी पहेली में स्वयं भरें।
 
(ख) अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न
                                   बहुविकल्पीय प्रश्न
1. भारत का सबसे लम्बा राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) कौन-सा है?
(क) एन०एच०44
(ख) एन०एच०8
(ग) एन०एच० 41
(घ) एन०एच० 88
                         उत्तर―(क) एन०एच० 44
 
2. सीमांत सड़कों का निर्माण तथा नियंत्रण करने वाली संस्था है―
(क) सीमा सड़क संगठन
(ख) केन्द्रीय निर्माण विभाग
(ग) सार्वजनिक निर्माण विभाग
(घ) शहरी मामलों का मंत्रालय
                                        उत्तर―(क) सीमा सड़क संगठन।
 
3. बड़ी लाइन की चौड़ाई क्या है?
(क) 1676 मिमी
(ख) 1000 मिमी
(ग) 762 मिमी
(घ) 610 मिमी
                    उत्तर―(क) 1676 मिमी।
 
4. भारत में रेल-लाइन का घनत्व सबसे कम किस राज्य में है?
(क) जम्मू एवं कश्मीर
(ख) राजस्थान
(ग) गुजरात
(घ) पश्चिमी बंगाल
                        उत्तर―(क) जम्मू एवं कश्मीर।
 
5. भारत की तटीय रेखा की लम्बाई क्या है?
(क) 7516.6 किमी
(ख) 7110 किमी
(ग) 7210 किमी
(घ) 7217 किमी
                       उत्तर―(क) 7516.6 किमी।
 
                        अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
 
प्रश्न 1. भारत में बड़े बंदरगाहों की संख्या कितनी है?
उत्तर―भारत में कुल 12 प्रमुख बड़े बन्दरगाह हैं जबकि छोटे बन्दरगाहों की संख्या 187 है।
 
प्रश्न 2. स्वर्णिम चतुर्भुज महामार्ग किन राज्यों के बीच है?
उत्तर― स्वर्णिम चतुर्भुज महामार्गः श्रीनगर से कन्याकुमारी और सिलचर (असम) से पोरबन्दर
(गुजरात) के बीच है।
 
प्रश्न 3. भारत में स्थलीय नौ-संचालन जलमार्ग की लम्बाई क्या है?
उत्तर― भारत में स्थलीय नौ-संचालन जलमार्ग की लम्बाई 14,500 किलोमीटर है।
 
प्रश्न 4. भारत के वृहद्तम विमान पत्तनों की संख्या क्या है?
उत्तर―भारत के वृहद्तम विमान पत्तनों की संख्या 12 है।
 
प्रश्न 5. तूतीकोरिन किस राज्य में स्थित महत्त्वपूर्ण बंदरगाह है?
उत्तर―तूतीकोरिन तमिलनाडु राज्य में स्थित महत्त्वपूर्ण बंदरगाह है।
 
                          लघु उत्तरीय प्रश्न
 
प्रश्न 1. पाइपलाइन परिवहन क्यों महत्त्वपूर्ण है?
उत्तर―वर्तमान में पाइपलाइन भी परिवहन का एक मुख्य साधन बन चुका है। पहले पाइपलाइन का
प्रयोग शहरों में पानी पहुंँचाने तक ही सीमित था, किन्तु अब इसका प्रयोग; गैस, पेट्रोलियम पदार्थ तथा कच्चे
तेल के परिवहन के लिए किया जाता है। पाइपलाइन की सहायता से गैस व पेट्रोलियम पदार्थों को
तेल-शोधक कारखानों, उर्वरक कारखानों तथा ताप-विद्युत गृहों तक पहुँचाया जाता है। पानीपत, बरौनी
आदि तेल-शोधक कारखानों की स्थापना तेल-उत्पादक क्षेत्रों से दूर हुई है, किन्तु इन स्थानों तक कच्चे तेल
की उपलब्धता पाइपलाइन के द्वारा ही सम्भव हो पाती है।
 
प्रश्न 2. भारत में संचालित वायु-सेवा कम्पनियों के नाम लिखिए।
उत्तर―सन् 1953 में भारत में वायु परिवहन का राष्ट्रीयकरण किया गया। इसके बाद से अब भारत में
व्यावहारिक तौर पर एयर इण्डिया तथा कुछ निजी एयरलाइन्स घरेलू विमान सेवाएँ प्रदान करती हैं। ‘पवन
हंस हैलीकॉप्टर लिमिटेड’ हेलीकॉप्टर सेवा प्रदान करने वाली संस्था है। इंडियन एयरलाइन्स का 26
फरवरी, 2011 को एयर इण्डिया में विलय हो गया।
 
प्रश्न 3. ‘कांडला’ पत्तन को क्यों विकसित किया गया?
उत्तर― आजादी के बाद सबसे पहले बन्दरगाह के रूप में गुजरात के कच्छ क्षेत्र में कांडला बन्दरगाह
को विकसित किया गया। कांडला एक ज्वारीय पत्तन है। इस बन्दरगाह का नाम परिवर्तित करके अब ‘दीन
दयाल बन्दरगाह’ कर दिया गया है। भारत-विभाजन के उपरान्त कराची के पाकिस्तान में जाने के बाद
कांडला पत्तन को विकसित किया गया है, जिसके माध्यम से मुम्बई व्यापारिक दबाव को कम किया गया है।
 
प्रश्न 4. ‘ज्वारीय पत्तन’ से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर― धरती पर स्थित सागरों व महासागरों के जल-स्तर का सामान्य स्तर से ऊपर उठना ‘ज्वार’ तथा
नीचे गिरना ‘भाटा’ कहलाता है। समुद्र में जब ज्वारभाटा की स्थित उत्पन्न होती है तो इसके परिणामस्वरूप
सागर के जल का स्तर शुरू में काफी ऊपर उठ जाता है। इसके कारण समुद्र के किनारे स्थित बंदरगाहों पर
कई बार जल आ जाता है और वहाँ समुद्री जल आदि के कारण चारों तरफ गंदगी फैल जाती है। भारत में
कांडला पत्तन और कोलकाता पत्तन ज्वारीय पत्तन हैं। ज्वारीय पत्तन होने के कारण इन बन्दरगाहों के
समुचित संचालन के लिए इनके तलछट को समय-समय पर साफ करना पड़ता है। समुद्र की ज्वारीय शक्ति
का प्रयोग ऊर्जा उत्पन्न करने में किया जाता है। यह ऊर्जा अनेक प्रकार से सहायक होती है।
 
प्रश्न 5. स्थलीय परिवहन को समझाइए।
उत्तर― स्थलीय परिवहन क्षेत्र के अन्तर्गत-सड़क, रेल व पाइपलाइन को सम्मिलित किया जाता है।
इनका संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित है―
(i) सड़क-परिवहन―भारत में सड़क परिवहन शताब्दियों से अस्तित्व में है। रेल-परिवहन की तुलना
में सड़क परिवहन अधिक सुविधाजनक है। इसका अनेक दृष्टियों से अत्यधिक महत्त्व है। भारत में
कुल 56,03 लाख किलोमीटर सड़क मार्ग है। भारत में सड़कों को उनकी क्षमता के आधार पर छह
भागों में बाँटा गया है―(1) स्वर्णिम चतुर्भुज महामार्ग, (2) राष्ट्रीय राजमार्ग, (3) राज्य-राजमार्ग,
(4) जिला-मार्ग, (5) अन्य सड़कें, तथा (6) सीमांत सड़कें।
(ii) रेल-परिवहन―भारतीय रेल-परिवहन; देश की सबसे बड़ी सार्वजनिक क्षेत्र की एजेंसी है। भारत
में पहली रेलगाड़ी सन् 1853 में मुम्बई तथा थाणे के मध्य चलाई गयी थी। यह दूरी 34 किमी. थी।
भारतीय रेलवे को कुल 17 जोन्स में बाँटकर रेलवे का संचालन किया जाता है। भारत में रेलवे
वस्तुओं और यात्रियों को लाने-ले जाने हेतु परिवहन का एक महत्त्वपूर्ण साधन है। सितम्बर, 2018
तक भारतीय रेलमार्ग की कुल लम्बाई 1,15,000 थी, जबकि रेल-संचालन की कुल लम्बाई
67,368 किमी. है। यहाँ कुल 7,349 रेलवे स्टेशन हैं। रेल-मार्ग पर प्रतिदिन 12,617 पैसेंजर ट्रेन
तथा 7,421 मालगाड़ियाँ चलती हैं। यात्री-ट्रेनों में लगभग 230 लाख यात्री प्रतिदिन यात्रा करते हैं।
(iii) पाइपलाइन-परिवहन―वर्तमान में पाइपलाइन भी परिवहन का एक मुख्य साधन बन चुकी है।
पहले पाइपलाइन का प्रयोग शहरों में पानी पहुँचाने तक ही सीमित था, किन्तु अब इसका प्रयोग;
गैस, पेट्रोलियम पदार्थ तथा कच्चे तेल के परिवहन के लिए किया जाता है। पाइपलाइन की सहायता
से गैस व पेट्रोलियम पदार्थों को तेल-शोधक कारखानों, उर्वरक कारखानों तथा ताप-विद्युत गृहों
तक पहुंँचाया जाता है। पानीपत, बरौनी आदि तेल-शोधक कारखानों की स्थापना तेल-उत्पादक
क्षेत्रों से दूर हुई है, किन्तु इन स्थानों तक कच्चे तेल की उपलब्धता पाइपलाइन के द्वारा ही सम्भव
हो पाती है।
 
                            दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
 
प्रश्न 1. परिवहन के विभिन्न साधनों की चर्चा कीजिए।
उत्तर―परिवहन के साधनों का वर्गीकरण; पृथ्वी के तीन क्षेत्रों; स्थल, जल एवं वायु के आधार पर ही
किया गया है। इनमें स्थल क्षेत्र के अन्तर्गत―सड़क, रेल व पाइपलाइन को सम्मिलित किया जाता है। इसी
प्रकार जल क्षेत्र के अन्तर्गत―आन्तरिक जल परिवहन एवं समुद्री जल परिवहन तथा वायु परिवहन के
अन्तर्गत-घरेलू (निजी व सार्वजनिक) व अन्तर्राष्ट्रीय वायु सेवाओं को सम्मिलित किया गया है।
परिवहन के इन समस्त साधनों का संक्षिप्त विवरण निम्नवत् है―
1. सड़क परिवहन―भारत में सड़क परिवहन शताब्दियों से अस्तित्व में है। भारत में रेल-परिवहन
की शुरुआत 19वीं शताब्दी में हुई। रेल-परिवहन की तुलना में सड़क परिवहन अधिक
सुविधाजनक है। इसका अनेक दृष्टियों से अत्यधिक महत्त्व है। भारत में कुल 56,03 लाख
किलोमीटर सड़क मार्ग है। भारत में सड़कों को उनकी क्षमता के आधार पर छह भागों में बाँटा गया
है―(i) स्वर्णिम चतुर्भुज महामार्ग, (ii) राष्ट्रीय राजमार्ग, (iii) राज्य-राजमार्ग, (iv) जिला-मार्ग, (v)
अन्य सड़कें, तथा (vi) सीमांत सड़कें।
2. रेल-परिवहन―भारत में रेलवे वस्तुओं यात्रियों को लाने-ले जाने हेतु परिवहन का एक
महत्त्वपूर्ण साधन है। सितम्बर, 2018 तक भारतीय रेलमार्ग की कुल लम्बाई 1,15,000 किमी थी।
यहाँ कुल 7,349 रेलवे स्टेशन हैं। यात्री-ट्रेनों में लगभग 230 लाख यात्री प्रतिदिन यात्रा करते हैं।
भारतीय रेल-परिवहन; देश की सबसे बड़ी सार्वजनिक क्षेत्र की एजेंसी है। भारत में पहली रेलगाड़ी
सन् 1853 में मुम्बई तथा थाणे के मध्य चलाई गयी थी। भारतीय रेलवे को कुल 17 जोन्स में
बाँटकर रेलवे का संचालन किया जाता है।
3. पाइपलाइन―पहले पाइपलाइन का प्रयोग शहरों में पानी पहुंचाने तक ही सीमित था, किन्तु अब
इसका प्रयोग गैस, पेट्रोलियम पदार्थ तथा कच्चे तेल के परिवहन के लिए किया जाता है।
पाइपलाइन की सहायता से गैस व पेट्रोलियम पदार्थों को तेल-शोधक कारखानों, उर्वरक कारखानों
तथा ताप-विद्युत गृहों तक पहुँचाया जाता है। पानीपत, बरौनी आदि तेल-शोधक कारखानों की
स्थापना तेल-उत्पादक क्षेत्रों से दूर हुई है, किन्तु इन स्थानों तक कच्चे तेल की उपलब्धता
पाइपलाइन के द्वारा ही सम्भव हो पाती है।
4. जल-परिवहन―जलीय परिवहन को दो भागों में बाँटा गया है-आन्तरिक जल परिवहन तथा
समुद्री जल परिवहन। भारत सरकार के द्वारा पाँच जलमार्गों को राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित किया गया
है। जलीय मार्गों की छोटी दूरी को जोड़कर परिवहन के स्थलीय माध्यमों-ट्रक, बस, कार आदि को
‘फेरी-सेवा’ के तहत एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाया जाता है। भारत में असम, झारखण्ड,
गुजरात व पश्चिमी बंगाल में यह सेवा प्रचलित है। इस सेवा या सर्विस को ‘रोल-ऑन, रॉल-ऑफ
सर्विस’ कहा जाता है। नदियों के रास्ते आन्तरिक परिवहन का प्रचलन प्राचीनकाल से ही था। जल
परिवहन सबसे सस्ता और सुगम परिवहन का साधन है। भारत में आन्तरिक नौचालन जलमार्ग की
कुल लम्बाई 14,500 किलोमीटर है। भारत का विदेशी व्यापार महत्त्वपूर्ण बंदरगाहों के माध्यम से
ही किया जाता है। देश का 95 प्रतिशत व्यापार समुद्री मार्ग से होता है। देश में 12 बन्दरगाह है। छोटे
बन्दरगाहों की संख्या 187 है।
5. वायु-परिवहन―वायु परिवहन एक आधुनिक साधन है, जो तीव्र, आरामदायक और प्रतिष्ठा का
प्रतीक है। इसके माध्यम से उन दुर्गम स्थानों तक पहुँचना सम्भव है, जहाँ स्थलीय परिवहन की
पहुँच कठिनाई से होती है। विशेषकर भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में वायु परिवहन अत्यधिक महत्त्वपूर्ण
साधन है। सन् 1953 में भारत में वायु परिवहन का राष्ट्रीयकरण किया गया। भारत में व्यावहारिक
तौर पर एयर इण्डिया तथा कुछ निजी एयरलाइन्स घरेलू विमान सेवाएँ प्रदान करती हैं। पवन हंस
हैलीकॉप्टर लिमिटेड’ हेलीकॉप्टर सेवा प्रदान करने वाली संस्था है। इंडियन एयरलाइन्स का 28
फरवरी, 2011 को एयर इण्डिया में विलय हो गया। हवाई यात्रा सभी व्यक्तियों को आसानी से
सुलभ हो, इसके लिए भारत सरकार ने ‘उड़ान परियोजना’ को आरम्भ किया है। इसका टैग लाइन
‘उड़े देश का आम आदमी’ है।
 
प्रश्न 2. भारत के पूर्वी तट पर स्थित बंदरगाहों के महत्त्व को दर्शाइए।
उत्तर―भारत के पूर्वी तट पर स्थित बंदरगाहों के महत्त्व को निम्न प्रकार समझा जा सकता है―
1. चेन्नई―भारत का सबसे प्राचीन कृत्रिम पत्तन चेन्नई में स्थित है। व्यापार की मात्रा एवं लदे सामान
के संदर्भ में इसका मुम्बई के बाद दूसरा स्थान।
2. विशाखापट्टनम―विशाखापट्टनम स्थल से घिरा, गहरा तथा सुरक्षित पत्तन है। प्रारंभ में यह
पत्तन लौह-अयस्क निर्यातक के रूप में विकसित किया गया था।
3. पारादीप―पारादीप पत्तन जो ओडिशा राज्य में स्थित है, विशेषत: लौह-अयस्क का निर्यात करता
है
4. कोलकाता―कोलकाता एक अंत: स्थलीय नदीय (Riverine) पत्तन है। यह पत्तन गंगा-ब्रह्मपुत्र
बेसिन की वृहत् तथा समृद्ध पृष्ठभूमि को सेवाएं प्रदान करता है। ज्वारीय (Tidal) पत्तन होने के
कारण एवं हुगली के तलछट जमाव से इसे नियमित रूप से साफ करना पड़ता है।
5. हल्दिया―कोलकाता पत्तन पर बढ़ते व्यापार को कम करने हेतु हल्दिया सहायक पत्तन के रूप में
विकसित किया गया है।
 
प्रश्न 3. भारत में पर्यटन की स्थिति का विवरण प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर― भारत में पर्यटन की स्थिति निम्न प्रकार है―
भारत ने पर्यटन के क्षेत्र में विकास किया है। विदेशी पर्यटकों के आगमन में लगातार, वृद्धि दर्ज की गई है।
भारत में पर्यटन आर्थिक विकास के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण स्थान प्राप्त कर चुका है। यह वर्ष 2017 में भारत के
कुल ‘सकल घरेलू उत्पाद’ (GDP) का 9.4% हिस्सा है।
वर्ष 2016 में 89 लाख से अधिक विदेशी पर्यटक भारत आए। भारत में 4 करोड़ से अधिक जनसंख्या
पर्यटन से प्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्राप्त करती है। पर्यटन राष्ट्रीय एकता को प्रोत्सहित करता है। इससे स्थानीय
हस्तकला उद्यमों को भी प्रोत्साहन मिलता है।
पर्यटन अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर संस्कृति तथा विरासत को समझने का मौका देता है। विदेशी पर्यटक भारत में कई
प्रकार के पर्यटन का लाभ उठाते हैं जिसमें चिकित्सा पर्यटन, विरासत पर्यटन, पर्यावरणीय पर्यटन,
सांस्कृतिक पर्यटन प्रमुख हैं।
भारत के विभिन्न हिस्सों में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। ग्रामीण पर्यटन के विकास के लिए प्रयत्न किए
जा रहे हैं।

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