UP Board Class 9 Social Science Geography | प्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य प्राणी

By | April 9, 2021

UP Board Class 9 Social Science Geography | प्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य प्राणी

UP Board Solutions for Class 9 Social Science Geography Chapter 5 प्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य प्राणी

अध्याय 5.           प्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य प्राणी
                                                         
                                           अभ्यास
NCERT प्रश्न
प्रश्न 1. वैकल्पिक प्रश्न
(i) रबड़ का संबंध किस प्रकार की वनस्पति से है?
(क) टुंड्रा
(ख) हिमालय
(ग) मैंग्रोव
(घ) उष्णकटिबंधीय वर्षा वन
                                   उत्तर―(घ)
 
(ii) सिनकोना के वृक्ष कितनी वर्षा वाले क्षेत्र में पाए जाते हैं?
(क) 100 सेमी
(ख) 70 सेमी
(ग) 50 सेमी
(घ) 50 सेमी से कम वर्षा
                                 उत्तर―(ख)
 
(iii) सिमलीपाल जीवमंडल निचय कौन-से राज्य में स्थित है?
(क) पंजाब
(ख) दिल्ली
(ग) ओडिशा
(घ) पश्चिम बंगाल
                       उत्तर―(ग)
 
(iv) भारत के कौन-से जीवमंडल निचय विश्व के जीवमंडल निचयों में लिए गए हैं?
(क) मानस 
(ख) मन्नार की खाड़ी
(ग) नीलगिरी
(घ) नंदादेवी
                 उत्तर―(ख)
 
प्रश्न 2.संक्षिप्त उत्तर वाले प्रश्न―
(i) पारिस्थितिक तंत्र किसे कहते हैं?
(ii) भारत में पादपों तथा जीवों का वितरण किन तत्त्वों द्वारा निर्धारित होता है?
(iii) जीवमंडल निचय से क्या अभिप्राय है? कोई दो उदाहरण दो।
(iv) कोई दो वन्य प्राणियों के नाम बताइए जो कि उष्णकटिबंधीय वर्षा और पर्वतीय
 वनस्पति में मिलते हैं।
उत्तर― (i) जीवन और वातावरण का आपस में गहरा सम्बन्ध है। इन दोनों को एक-दूसरे से
अलग करना कठिन है। ये एक-दूसरे के पूरक हैं। जीवन का विकास तभी हो सकता है
जब वातावरण सर्वथा अनुकूल हो। किसी प्रदेश विशेष के प्रत्येक प्रकार के जीवन व
भौतिक वातावरण को पारिस्थितिकी (Ecosystem) या पारितन्त्र की संज्ञा प्रदान की
जाती है। वनस्पति और पशुओं की विभिन्न जातियाँ एवं मानव आदि पारिस्थितिकी का
अभिन्न अंग हैं जो परस्पर एक-दूसरे को प्रभावित करते रहते हैं। इनमें आपसी संतुलन
होना बड़ा आवश्यक है।
 
(ii) पृथ्वी पर पौधों (पादपों) और जीवों का वितरण मुख्य रूप से जलवायु द्वारा निर्धारित होता
है चाहे मृदा, उच्चावच अपवाह जैसे कुछ अन्य तत्त्व भी इन्हें प्रभावित करते हों।
 
(iii) जीव-आरक्षित क्षेत्र एक विशाल जंगली भूमि को कहते हैं जिसमें विभिन्न जीव-जन्तुओं एवं
वनस्पति को उनके प्राकृतिक रूप में रखा जाता है।
 
ऐसे जीव-आरक्षित क्षेत्रों का अपना विशेष महत्त्व होता है।
(a) ऐसे क्षेत्रों में विभिन्न जीव-जन्तुओं एवं वनस्पति को उनके प्राकृतिक रूप में रखने का
प्रयत्न किया जाता है।
(b) इनमें हाथी और गैंडा जैसे संकटापन्न वन-जीवन को सुरक्षा प्रदान की जाती है।
(iv) उष्णकटिबंधीय वर्षा क्षेत्र में पाए जाने वाले जन्तु हाथी, बन्दर, लंगूर, एक सींग वाला गैंडा,
हिरण आदि तथा पर्वतीय वनस्पति में पाए जाने वाले जन्तु याक, बकरियाँ, भेड़ें और तेन्दुआ
आदि जीव-जन्तु पाए जाते हैं।
 
प्रश्न 3. निम्नलिखित में अंतर कीजिए―
(i) वनस्पति-जगत तथा प्राणी-जगत
(ii) सदाबहार और पर्णपाती वन
उत्तर― (i) किसी देश की वनस्पतियों में उस देश का समस्त वनस्पति-जगत शामिल होता है।
इसमें वनों में उगने वाले वृक्ष, मनुष्य द्वारा उगाए गए फूलदार और बिना फूलों वाले
वृक्ष, घास वाले क्षेत्र व झाड़ियाँ आदि सम्मिलित हैं। भारत में लगभग 49,000 जातियों
के पौधे पाए जाते हैं। इनमें से 5,000 ऐसे हैं जो केवल भारत में ही मिलते हैं।
जीव-जन्तुओं में पक्षी, मछलियाँ और पशु आदि शामिल हैं जिनमें स्तनीय पशु रेंगने वाले
पशु, कीड़े-मकौड़े, जल और स्थल में रहने वाले प्राणी आदि सम्मिलित हैं। भारत का
पशु-जगत धनी तथा विभिन्न प्रकार का है। भारत में पशुओं की लगभग 81,000 जातियाँ हैं।
 
(ii) (a) सदाबहार वन (या उष्ण कटिबंधीय वर्षा वन) भारत के पश्चिमी घाटों के अधिक वर्षा
वाले क्षेत्रों तथा लक्षद्वीप एवं अण्डमान और निकोबार द्वीप समूहों में पाए जाते हैं।
इसके विपरीत पर्णपाती वन देश के पूर्वी भागों, हिमालय के गिरिपाद प्रदेशों, झारखण्ड,
पश्चिमी ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पश्चिमी घाटों की ढालों पर पाए जाते हैं।
(b) सदाबहार वनों में आबनूस (एबोनी), महोगनी तथा रोजवुड आदि के वृक्ष पाए जाते हैं.
जबकि पर्णपाती वनों में सागौन, बाँस, साल, शीशम और खैर आदि वृक्ष मिलते हैं।
(c) सदाबहार वनों के वृक्षों में पतझड़ होने का कोई निश्चित समय नहीं होता।
 
प्रश्न 4. भारत में विभिन्न प्रकार की पाई जाने वाली वनस्पति के नाम बताएँ और अधिक
ऊँचाई पर पाई जाने वाली वनस्पति का ब्यौरा दीजिए।
उत्तर― प्राकृतिक वनस्पति का अर्थ प्रायः वनों से लिया जाता है। भारत में आज भी अनेक प्रकार के
प्राकृतिक वनस्पति या वन पाए जाते हैं। भारत में प्राकृतिक वनस्पति के खण्ड या वनों के मुख्य प्रकार
निम्नलिखित हैं―
(i) उष्ण कटिबंधीय वर्षा वन
(ii) उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वन या मानसूनी वन
(iii) काँटेदार वन और झाड़ियाँ
(iv) शीतोष्ण कटिबंधीय वन एवं घास के मैदान
(v) अल्पाइन एवं टुंड्रा वनस्पति
(vi) ज्वारीय वन
 
(i) उष्ण कटिबंधीय वर्षा वन―ये वन पश्चिमी घाट के अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों तथा लक्षद्वीप
तथा अण्डमान और निकोबार द्वीप समूहों में पाए जाते हैं। इन वनों की मुख्य विशेषताएँ इस
प्रकार हैं―(a) सामान्यतः ये वन सघन होते हैं और वृक्षों की ऊँचाई 60 मीटर से भी
अधिक होती है। (b) इन भागों में 300 सेमी वार्षिक वर्षा होती है तथा शुष्क ऋतु छोटी
होती है। परन्तु 200 से 300 सेमी वर्षा वाले क्षेत्रों में उष्ण कटिबंधीय अर्ध-सदाबहार वन
पाए जाते हैं। (c) इस प्रकार के वनों में महोगनी, आबनूस (एबोनी) और रोजवुड जैसे
अनेक प्रकार के वृक्ष पाए जाते हैं। परन्तु अधिक ऊँचाई पर पाए जाने के कारण उनका
इतना आर्थिक प्रयोग नहीं हो पाता। (d) इस क्षेत्र में मुख्य रूप से हाथी, बन्दर, लंगूर, एक
सींग वाला गैंडा, हिरण और अनेक प्रकार के पक्षी और रेंगने वाले जीव-जन्तु पाए जाते हैं।
 
(ii) उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वन या मानसूनी वन―इन वनों की मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार
हैं―(a) ऐसे वन भारत में सबसे अधिक विस्तृत हैं। ये हिमालय के गिरिपाद प्रदेश (Foot
Hills), झारखण्ड, पश्चिमी ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पश्चिमी घाटों के ढालों में पाए जाते
हैं। (b) शुष्क ऋतु में इनमें पाए जाने वाले पेड़ अपने पत्ते गिरा देते हैं। (c) इन वनों में
सागौन, शीशम, साल, चन्दन, खैर आदि के पेड़ों के अतिरिक्त झाड़ियाँ तथा बाँस भी पाए
जाते हैं। इन वनों का भारत के लिए बहुत आर्थिक महत्त्व है। (d) इन वनों को कई बार आगे
आर्द्र पर्णपाती वनों और शुष्क पर्णपाती वनों में भी बाँट दिया जाता है। पहले प्रकार के वन
100 से 200 सेमी की वर्षा वाले भागों में होते हैं जबकि दूसरे प्रकार वाले वन प्रायः 70 से
100 सेमी की वर्षा वाले भागों में होते हैं। (e) इस क्षेत्र में बाघ, चीता, हाथी, हिरण, कछुए,
सुअर तथा अनेक प्रकार के पक्षी और कीड़े-मकौड़े आदि जीव-जन्तु पाए जाते हैं।
 
(iii) काँटेदार वन और झाड़ियाँ―इन वनों की मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं―(a) ये वन
ऐसे स्थानों पर होते हैं जहाँ 70 सेमी से कम वार्षिक वर्षा होती है। (b) ये काँटेदार वन देश
के उत्तरी-पश्चिमी शुष्क भागों; जैसे―गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश और हरियाणा के
अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में पाए जाते हैं। (c) इन वनों में जो वृक्ष होते हैं वे छोटे, काँटेदार और
बिखरे हुए होते हैं। (d) इन वनों में मुख्य रूप से बबूल (अकासिया), कीकर आदि पेड़ों के
अतिरिक्त झाड़ियाँ भी पाई जाती हैं। इन भागों में प्राय: 70 सेमी से कम वर्षा होती है।
(e) इस क्षेत्र में भेड़-बकरियाँ, जंगली गधे, घोड़े, ऊँट, भेड़िये, बाघ और चीता आदि
जीव-जन्तु पाए जाते हैं।
 
(iv) शीतोष्ण कटिबंधीय वन एवं घास के मैदान―इस प्रकार के वनस्पति खण्ड की मुख्य
विशेषताएँ इस प्रकार हैं―(a) ऐसे वन पर्वतीय क्षेत्रों में 1,000 से 3,000 मीटर की ऊंँचाई
वाले भागों में पाए जाते हैं। ऊँचाई के साथ-साथ वनस्पति की पेटियों में अन्तर आता जाता
है। (b) हिमालय के गिरिपाद प्रदेशों में उष्ण कटिबंधीय वन पाए जाते हैं जिनमें सागौन
सबसे प्रमुख प्रजाति है। (c) इनके ऊपर के भागों में 1,000 से 2,000 मीटर तक ऊँचाई
वाले क्षेत्रों में आर्द्र शीतोष्ण कटिबंधीय वन पाए जाते हैं जिनमें चौड़ी पत्तियों वाले ओक
और चेस्टनट वृक्ष प्रमुख हैं। (d) इससे ऊपर 1,500 से 3,000 मीटर की ऊँचाई के बीच
चीड़, देवदार, सिल्वर-फर, स्यूस और सीडार आदि कोणधारी वृक्ष पाए जाते हैं। (e) इस
भाग में जंगली भेड़-बकरियाँ, बारहसिंगा, हिरण, खरगोश, गिलहरियाँ तथा बर्फ में रहने
वाले चीते आदि पाए जाते हैं।
 
(v) पर्वतीय वन या अल्पाइन एवं टुंड्रा वनस्पति―इस वनस्पति खण्ड की मुख्य विशेषताएँ
इस प्रकार हैं―(a) समुद्र तल से 3,600 मीटर से अधिक ऊँचाइयों वाले भागों में अल्पाइन
वनस्पति पाई जाती है। (b) इनमें सिल्वर-फर, जूनिपर, पाइन एवं बर्च के वृक्ष मुख्य रूप से
पाए जाते हैं। जैसे-जैसे हिमरेखा निकट पहुँचती है इन वृक्षों के आकार छोटे होते जाते हैं।
(C) अन्तत: ऊँचाई के साथ-साथ अल्पाइन घास के मैदान शुरू हो जाते हैं जो पशुचारण के
काम आते हैं और अनेक लोगों (जैसे गुज्जर और बक्करवाल) को रोजी-रोटी उपलब्ध
कराते हैं। (d) इस भाग में याक, बकरियाँ, भेड़ें और तेंदुआ आदि जीव-जन्तु पाए जाते हैं।
 
(vi) ज्वारीय वन-इन वनों की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं―(a) ज्वारीय वन उन समुद्री
तटों के साथ-साथ पाए जाते हैं जहाँ नदियाँ आकर समुद्र से मिलती हैं। ऐसे में दूर-दूर तक
समुद्र का जल ऊँचे-नीचे होता रहता है। (b) ऐसे वनों में पेनग्रेव के वृक्ष खूब पाए जाते हैं
जो दोनों खारे और ताजे पानी में पनपते हैं (C) सुन्दरी नामक वृक्ष इन वनों का सुप्रसिद्ध वृक्ष
है जिस कारण गंगा-ब्रह्मपुत्र के विश्वप्रसिद्ध डेल्टा के वन सुन्दरवन (Sundervans) के
नाम से प्रसिद्ध हैं।
 
प्रश्न 5. भारत में बहुत संख्या में जीव और पादप प्रजातियाँ संकटग्रस्त हैं―उदाहरण
सहित कारण दीजिए।
उत्तर― (i) विलुप्त जातियाँ वनस्पति और जीवों की वे प्रजातियाँ हैं जो बिल्कुल समाप्त हो चुकी हैं
और इन्हें पिछले 6 से 10 दशकों में कहीं भी देखा नहीं गया है। इसके विपरीत संकटग्रस्त
वनस्पति और जीवों की वे प्रजातियाँ हैं जिनका विनष्ट होने का खतरा बना हुआ है।
 
(ii) लगभग पौधों (पादपों) की 20 प्रजातियाँ तो बिल्कुल नष्ट हो चुकी हैं जबकि अन्य कोई
1,300 के लगभग संकटग्रस्त प्रजातियाँ हैं।
 
(iii) जहाँ तक विलुप्त जातियों का प्रश्न है उनके लिए अब कुछ भी नहीं किया जा सकता। परन्तु
जहाँ तक संकटग्रस्त प्रजातियों का प्रश्न है उन्हें बचाने के प्रयत्न किए जा सकते हैं। इसीलिए
ऐसी प्रजातियों के संरक्षण के लिए अनेक आरक्षित क्षेत्रों (Biosphere Reserves) की
स्थापना की गई है।
 
प्रश्न 6. भारत वनस्पति-जगत तथा प्राणी-जगत की धरोहर में धनी क्यों है?
उत्तर― भारत में वनस्पति और जीव-जन्तुओं की विशाल विरासत है, जिसके मुख्य कारण इस
प्रकार हैं―
(i) तापमान―भारत में हर प्रकार का तापमान एवं जलवायु पाई जाती है। कुछ प्रदेशों में सम
जलवायु है जबकि कुछ अन्य प्रदेशों में विषम जलवायु पाई जाती है। वहाँ गर्मियों में अधिक
गर्मी और सर्दियों में अधिक सर्दी होती है। हिमालय में तो ऊँचाई के साथ-साथ धूप के
वितरण से भी अन्तर आता जाता है, जबकि जम्मू-कश्मीर में बर्फ पड़ रही होती है तो
दक्षिण में बहुत गर्मी होती है। इस तरह हर प्रकार का तापमान मिलने से भारत में हर प्रकार
की वनस्पति और जीव-जन्तु पाए जाते हैं।
 
(ii) धूप―सूर्य की रोशनी जो ऊँचाई, भूमध्य रेखा से दूरी, दिन की लम्बाई और ऋतुओं पर निर्भर
करती है, वनस्पति और जीव-जन्तुओं के विकास पर काफी प्रभाव डालती है। भारत एक गर्म
देश है इसलिए यहाँ धूप की कमी नहीं, जिसके लिए वृक्ष वनों में एक-दूसरे से ऊपर बढ़ने का
प्रयत्न करते हैं। पशुओं को भी धूप बहुत पसन्द है जिसकी भारत में कमी नहीं।
 
(iii) वर्षा–भारत के विभिन्न क्षेत्रों में वर्षा में भी बड़ी भिन्नता पाई जाती है। भारत में 200 सेमी
से अधिक वार्षिक वर्षा वाले प्रदेश भी हैं मध्य वर्षा वाले भी और कम वर्षा वाले भी।
इसलिए भारत में हर प्रकार की वनस्पति और जीव-जन्तु पाए जाते हैं।
 
(iv) मृदा या मिट्टी―भारत एक विशाल देश है जिसमें हर प्रकार की मिट्टी पाई जाती है;
जैसे-जलोढ़ मिट्टी, काली मिट्टी, लाल मिट्टी, लैटेराइट मिट्टी आदि इसलिए यहाँ हर
प्रकार की वनस्पति और उस पर निर्भर रहने वाले जीव-जन्तु पाए जाते हैं।
 
(v) धरातल―भारत में ऊँचे-से-ऊँची धरातल तथा नीचे-से-नीची धरातल के स्थान पाए जाते
हैं। कहीं यहाँ मैदान हैं, कहीं पठार और कहीं पहाड़ हैं, जिसके कारण भारत में हर प्रकार
की वनस्पति और जीव-जन्तुओं के लिए आदर्श वातावरण मिल जाता है और उन्हें
फलने-फूलने में कोई अड़चन नहीं रहती।
 
मानचित्र कौशल
भारत के मानचित्र पर निम्नलिखित दिखाएँ और अंकित करें―
(i) उष्णकटिबंधीय वर्षा वन
(ii) उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन
(iii) दो जीवमंडल निचय भारत के उत्तरी, दक्षिणी, पूर्वी और पश्चिमी भागों में।
उत्तर― (i) उष्णकटिबंधीय वर्षा वन―पश्चिमी घाट, लक्षद्वीप, अंडमान और निकोबार द्वीप
समूह, असम के ऊपरी भाग, तमिलनाडु के तट।
 
(ii) उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन―प्रायद्वीपीय पठार के वर्षा वाले क्षेत्र, उत्तर प्रदेश तथा
बिहार के मैदान।
(iii) दो जीवमंडल निचय भारत के उत्तरी, दक्षिणी, पूर्वी और पश्चिमी भागों में।
(a) उत्तरी भाग में―1. कॉर्बेट, 2. दुधवा।
(b) दक्षिणी भाग में―1. बांदीपुर, 2. पेरियार।
(c) पूर्वी भाग में―1. राजदेबरा, 2. सिमलीपाल।
(d) पश्चिमी भाग में―1. गिर, 2. कन्हेरी।
 
                             अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न
बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1. हमारा देश भारत विश्व के………12 देशों में से एक है।
(क) सघन आबादी वाले
(ख) आर्थिक रूप से विकसित
(ग) विशाल जैविक भिन्नता
(घ) इनमें से कोई नहीं
                          उत्तर―(ग) विशाल जैविक भिन्नता
 
प्रश्न 2. पादप भिन्नता में भारत का विश्व में कौन-सा स्थान है?
(क) पाँचवाँ
(ख) चौथा
(ग) छठा
(घ) दसवाँ
             उत्तर―(घ) दसवाँ
 
प्रश्न 3. उभयचर किसे कहते है?
(क) ऐसे जीव जो जल तथा स्थल दोनों पर रह सकते हैं।
(ख) ऐसे जीव जो केवल जल में रह सकते हैं।
(ग) ऐसे जीव जो केवल स्थल पर रह सकते हैं।
(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं
                     उत्तर―(क) ऐसे जीव जो जल तथा स्थल दोनों पर रह सकते हैं।
 
प्रश्न 4. भूमि पर विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों तथा वन्य जीवों के विशाल पारिस्थितिक
तंत्र को क्या कहते हैं?
(क) प्राणी-जगत्
(ख) प्राणी उद्यान
(ग) जीवमंडल
(घ) जीवोम
              उत्तर―(घ) जीवोम
 
प्रश्न 5. उष्णकटिबंधीय वर्षा वन उन क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहाँ वर्षा―
(क) 200 सेमी से 70 सेमी होती है।
(ख) 200 सेमी से 100 के बीच होती है।
(ग) 200 सेमी से अधिक होती है।
(घ) 100 सेमी से 70 सेमी के बीच होती है।
                                           उत्तर―(ग) 200 सेमी से अधिक होती है।
 
प्रश्न 6. सर्पगंधा कहाँ प्रयोग होती है?
(क) ब्लड-प्रेशर का इलाज करने में
(ख) मधुमेह को नियंत्रित करने में
(ग) ब्लड-प्रेशर को नियंत्रित करने में
(घ) दुखती आँखों को ठीक करने में
                                   उत्तर―(क) ब्लड-प्रेशर का इलाज करने में
 
प्रश्न 7. वन्य जीव संरक्षण अधिनियम भारत में कब लागू हुआ?
(क) 1968 में
(ख) 1975 में
(ग) 1971 में
(घ) 1977 में
                 उत्तर―(ग) 1971 में
 
प्रश्न 8. प्राणी एवं वनस्पति-जगत के संरक्षण हेतु भारत में कितने जीवमंडल निश्चय
संरक्षित किए गए हैं?
(क) पंद्रह
(ख) सोलह
(ग) सत्रह
(घ) चौदह
             उत्तर―(घ) चौदह
 
प्रश्न 9. भारत में जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान कहाँ स्थित है?
(क) मध्य प्रदेश में
(ख) उत्तराखण्ड में
(ग) हरियाणा में
(घ) हिमाचल प्रदेश में
                             उत्तर―(ख) उत्तराखण्ड में
 
प्रश्न 10. चार सींगों वाले मृग को क्या कहा जाता है?
(क) चौसिंघा
(ख) नीलगाय
(ग) मृग
(घ) गैजल
              उत्तर―(क) चौसिंघा
 
प्रश्न 11.किस पौधे के बीज का चूर्ण मधुमेह को नियंत्रित करने हेतु प्रयोग किया जाता है?
(क) सर्पगंधा
(ख) नीम
(ग) जामुन
(घ) अर्जुन
              उत्तर―(ग) जामुन
 
प्रश्न 12.किस पौधे की कलियाँ व जड़ें पाचन संबंधी समस्याओं में लाभदायक है?
(क) कचनार
(ख) जामुन
(ग) अर्जुन 
(घ) नीम
            उत्तर―(क) कचनार
 
प्रश्न 13.निम्नलिखित में से कौन-सा एक पक्षी विहार नहीं है?
(क) बांदीपुर
(ख) राजाजी
(ग) रंगनाथिट्डु
(घ) गुइंडी
                उत्तर―(ग) रंगनाथिट्डु
 
प्रश्न 14.तिब्बती जंगली गधे को और किस नाम से जाना जाता है?
(क) नीलगाय
(ख) कियोंग
(ग) चौसिंघा
(घ) इनमें से कोई नहीं
                             उत्तर―(ख) कियोंग
 
प्रश्न 15.रॉयल बंगाल टाइगर कहाँ पाए जाते हैं?
(क) मैंग्रोव वनों में
(ख) पर्वतीय वनों में
(ग) कँटीले वनों में
(घ) उष्णकटिबंधीय सदाबहार वनों में
                                       उत्तर―(क) मैंग्रोव वनों में
 
                         अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
 
प्रश्न 1. प्राकृतिक वनस्पति से क्या तात्पर्य है?
उत्तर― प्राकृतिक वनस्पति का अर्थ है वनस्पति का वह भाग जो कि मनुष्य की सहायता के बिना
अपने आप पैदा होता है और लंबे समय तक उस पर मानवीय प्रभाव नहीं पड़ता।
 
प्रश्न 2. जीवमंडल निचय से क्या तात्पर्य है?
उत्तर― एक संरक्षित जीवमंडल जिसका संरक्षण इस प्रकार किया जाता है कि न केवल उसकी
जैविक भिन्नता संरक्षित की जाती है अपितु इसके संसाधनों का प्रयोग भी स्थानीय समुदायों के 
लाभ हेतु टिकाऊ तरीके से किया जाता है।
 
प्रश्न 3. पारिस्थितिक तंत्र क्या है?
उत्तर― पृथ्वी पर एक जीव दूसरे जीव से अंतसंबंधित है, एक के बिना दूसरे की कल्पना भी नहीं
की जा सकती। इसे पारिस्थितिकी तंत्र कहते हैं।
 
प्रश्न 4. नेशनल पार्क क्या है?
उत्तर― एक आरक्षित क्षेत्र जहाँ प्राकृतिक वनस्पति, वन्य जीव जंतुओं तथा प्राकृतिक पर्यावरण को
सुरक्षित रखा जाता है।
 
प्रश्न 5. पारिस्थितिक तंत्र के असंतुलन के मुख्य कारण क्या हैं?
उत्तर― पारिस्थितिक तंत्र के असंतुलन का मुख्य कारण लालची व्यापारियों का अपने व्यवसाय के
लिए अत्यधिक शिकार करना है। रासायनिक और औद्योगिक अवशिष्ट तथा तेजाबी जमाव के कारण
प्रदूषण, विदेशी प्रजातियों का प्रवेश, कृषि तथा निवास के लिए वनों की अंधाधुंध कटाई पारिस्थितिक
तंत्र के असंतुलन के कारण हैं।
 
प्रश्न 6. “पारिस्थितिक तंत्र असंतुलित हो गया है।” उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए।
उत्तर― मनुष्यों द्वारा पादपों और जीवों के अत्यधिक उपयोग के कारण असंतुलित हो गया है।
उदाहरणस्वरूप लगभग 1300 पादप प्रजातियाँ संकट में हैं तथा 20 प्रजातियाँ विनष्ट हो चुकी हैं।
काफी वन्य जीवन प्रजातियाँ भी संकट में हैं और कुछ विनष्ट हो चुकी हैं।
 
प्रश्न 7. जीवोम किसे कहते हैं?
उत्तर― भूमि पर विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों तथा वन्य जीवों के पारिस्थितिक तंत्र को जीवोम
कहते हैं।
 
प्रश्न 8. जैव-विविधता से क्या तात्पर्य है?
उत्तर― विभिन्न प्रकार के पादपों एवं प्राणी प्रजातियों का किसी वातावरण विशेष में एक साथ
अस्तित्व जैव-विविधता कहलाता है।
 
प्रश्न 9. प्रवासी पक्षी के बारे में टिप्पणी लिखिए।
उत्तर― भारत के कुछ दलदली भाग प्रवासी पक्षियों के लिए प्रसिद्ध हैं। शीत ऋतु में साइबेरियन
सारस बहुत संख्या में आते हैं। इन पक्षियों का एक मनपसंद स्थान कच्छ का रन है। जिस स्थान पर
मरुभूमि समुद्र में मिलती है, वहाँ लाल सुंदर कलंगी वाली फ्लैमिंगोए हजारों की संख्या में आती हैं और
खारे कीचड़ के ढेर बनाकर उनमें घोंसले बनाती हैं और बच्चों को पालती हैं। देश में अनेक दर्शनीय
दृश्यों में से यह भी एक है।
 
प्रश्न 10.देशज और विदेशज पौधे में अंतर बताइए।
उत्तर― वह वनस्पति जो कि मूलरूप से भारतीय है उसे ‘देशज’ पौधे कहते हैं लेकिन जो पौधे भारत
के बाहर से आए हैं उन्हें ‘विदेशज’ पौधे कहते हैं।
 
प्रश्न 11.”भारत एक जैव-विविधता वाला देश है।” व्याख्या कीजिए।
उत्तर― भारत विश्व के मुख्य 12 जैव-विविधता वाले देशों में से एक है। लगभग 47,000 विभिन्न
जातियों के पौधे पाए जाने के कारण यह देश विश्व में दसवें स्थान पर और एशिया के देशों में चौथे
स्थान पर है। भारत में लगभग 15,000 फूलों के पौधे हैं जो कि विश्व में फूलों के पौधों का 6 प्रतिशत
है। भारत में लगभग 89,000 जातियों के जानवर तथा विभिन्न प्रकार की मछलियाँ ताजे तथा समुद्री
पानी में पाए जाते हैं।
 
प्रश्न 12.भारत में शेर और बाघ कहाँ पाए जाते हैं?
उत्तर― भारतीय शेरों का प्राकृतिक वास स्थल गुजरात में गिर जंगल है। बाघ मध्य प्रदेश तथा
झारखंड के वनों, पश्चिम बंगाल के सुंदरवन तथा हिमालयी क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
 
प्रश्न 13.मैग्रोव वन में कौन-कौन से वृक्ष और जानवर पाये जाते हैं?
उत्तर― मैंग्रोव वन में गंगा ब्रह्मपुत्र डेल्टा में सुंदरी वृक्ष पाए जाते हैं जिनसे मजबूत लकड़ी प्राप्त
होती है। नारियल, ताड़, क्योड़ा, ऐंगार के वृक्ष भी इन भागों में पाए जाते हैं।
इस क्षेत्र का रॉयल बंगाल टाइगर प्रसिद्ध जानवर है। इसके अतिरिक्त कछुए, मगरमच्छ, घड़ियाल
एवं कई प्रकार के साँप भी इन जंगलों में मिलते हैं।
 
प्रश्न14. कँटीले वन में कौन-कौन से वृक्ष और जानवर पाये जाते हैं?
उत्तर― कँटीले वन में अकासिया, खजूर, यूफोरबिया, नागफनी, कीकर, खैर, बबूल आदि वृक्ष पाए
जाते हैं। इस वन में प्राय: खरगोश, चूहे, लोमड़ी, भेड़िये, शेर, जंगली गधा, घोड़े तथा ऊँट पाए जाते हैं।
 
                                         लघु उत्तरीय प्रश्न
 
प्रश्न 1. सरकार द्वारा वनस्पति एवं प्राणी-जगत् की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
उत्तर― सरकार द्वारा वनस्पति एवं प्राणी-जगत् की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदम-
(i) 1972 में भारत में वन्य प्राणी सुरक्षा अधिनियम लागू किया गया।
 
(ii) सन् 1992 से सरकार द्वारा पादप उद्यानों को वित्तीय तथा तकनीकी सहायता देने की योजना
बनाई गई है।
 
(iii) शेर संरक्षण, गैंडा संरक्षण, भारतीय भैसा संरक्षण तथा पारिस्थितिक तंत्र के संतुलन के लिए
कई योजनाएं बनाई गई हैं।
 
(iv) 89 राष्ट्रीय उद्यान, 49 पक्षी आश्रय स्थल और कई चिड़ियाघर राष्ट्र की पादप और जीव
संपत्ति की रक्षा के लिए बनाए गए हैं।
 
(v) देश में वनस्पति एवं प्राणी-जगत् की सुरक्षा के लिए चौदह जीवमंडल निचय स्थापित किए
गए हैं।
 
प्रश्न 2. वनों का क्या महत्त्व है?
उत्तर― वन नवीनीकरण योग्य संसाधन है तथा वातावरण की गुणवत्ता में वृद्धि करने में महत्त्वपूर्ण
भूमिका निभाते हैं। वन निम्नलिखित कारणों से महत्त्वपूर्ण हैं―
(i) वन स्थानीय वातावरण को बदल देते हैं।
(ii) ये मृदा अपरदन को नियंत्रित करते हैं।
(iii) ये नदियों के प्रवाह को रोकते हैं।
(iv) ये बहुत सारे उद्योगों के आधार हैं।
(v) ये पवन तथा तापमान को नियंत्रित करते हैं और वर्षा लाने में भी सहायता करते हैं।
(vi) इनसे मृदा को जीवाश्म मिलता है और वन्य प्राणियों को आश्रय।
(vii) ये विभिन्न उपभोक्ता सामग्री जैसे जलावन, औषधि तथा जड़ी-बूटियाँ उपलब्ध कराते हैं।
(viii) ये कई समुदायों को जीविका प्रदान करते हैं।
(ix) ये हमारे वातावरण की वायु-प्रदूषण से रक्षा करने में सहायता करते हैं।
 
प्रश्न 3. पारिस्थितिक तंत्र किसे कहते हैं? इसके अंगों तथा उनकी परस्पर निर्भरता के बारे
में संक्षेप में लिखिए।
उत्तर― किसी क्षेत्र के सभी पौधे एवं जीव-जंतु उनके भौतिक वातावरण में परस्पर निर्भर तथा
एक-दूसरे से संबंधित होते हैं तथा इस प्रकार वे एक पारिस्थितिक तंत्र का निर्माण करते हैं। पारस्परिक
निर्भरता से निर्मित भौतिक वातावरण एवं उसमें रहने वाले जीवों का तंत्र है।
पौधे, प्राणी, मुनष्य तथा वातावरण इसके विभिन्न अंग हैं। पौधे पृथ्वी का प्रमुख प्राकृतिक अंग है जो
सूर्य के प्रकाश से अपना भोजन बना सकते हैं। पौधे किसी भी देश के प्राकृतिक संसाधनों की रीढ़ हैं।
किसी क्षेत्र के पादपों की प्रकृति काफी हद तक उस क्षेत्र के प्राणी जीवन को प्रभावित करती है। जब
वनस्पति बदल जाती है तो प्राणी जीवन भी बदल जाता है। मानव भी पारिस्थितिक तंत्र का एक अभिन्न
अंग है। वे वनस्पति तथा वन्य जीवन का उपभोग करते हैं। किसी भी क्षेत्र के पादप तथा प्राणी आपस में
तथा अपने भौतिक पर्यावरण से अंतर्संबंधित होते हैं।
 
प्रश्न 4. उच्चावच तथा वर्षण प्राकृतिक वनस्पति के वितरण को किस प्रकार प्रभावित
करता है?
उत्तर― किसी क्षेत्र का उच्चावच तथा वर्षण प्राकृतिक वनस्पति के वितरण को निर्धारित करता है।
भारतीय उपमहाद्वीप में इसे निम्नलिखित बिन्दुओं में देखा जा सकता है-
(i) पश्चिमी घाटों की पश्चिमी ढलानों पर 200 सेमी से अधिक वर्षा होती है। भारी वर्षा के
कारण यहाँ उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन बड़े स्तर पर पाए जाते हैं।
(ii) विभिन्न पर्वतीय क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार की वनस्पति पाई जाती है।
(iii) 70 सेमी से कम वर्षा वाले क्षेत्रों में प्राकृतिक वनस्पति में अकेशिया, पाम तथा झाड़ियाँ
आदि पाए जाते हैं।
 
प्रश्न 5. वनस्पति एवं प्राणी-जगत की सुरक्षा करना क्यों आवश्यक है?
उत्तर― वनस्पति एवं प्राणी-जगत् की सुरक्षा करना निम्नलिखित कारणों से महत्त्वपूर्ण है-
(i) पालतू पशु हमें दूध उपलब्ध कराते हैं। वे हमें मांस, अंडे, मछली आदि भी उपलब्ध कराते
हैं तथा परिवहन में सहायता करते हैं।
 
(ii) कीट पतंगे हमारी फसलों तथा फलदार पौधों के परागण में सहायता करते हैं तथा
हानिकारक कीटों पर जैविक नियंत्रण करने में सहायक हैं।
 
(iii) पौधे हमें भोजन, आश्रय तथा अन्य कई लाभदायक चीजें प्रदान करते हैं। औषधीय पादप;
जैसे-सर्पगंधा व जामुन मानवजाति के लिए अत्यधिक महत्त्व के हैं।
 
(iv) प्रत्येक प्रजाति पारिस्थितिक तंत्र में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अत: उनका संरक्षण
अति आवश्यक है।
 
प्रश्न 6.मैंग्रोव वनों पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर― मैंग्रोव एक ऐसी वनस्पति होती है जिसमें पौधों की जड़ें जमीन के ऊपर होती हैं तथा ये प्रायः
डेल्टाई क्षेत्रों में पाए जाते हैं अथवा ज्वार-भाटा वाले तटीय क्षेत्रों में यह वनस्पति मिलती है। इन वनों में
पाए जाने वाले वृक्षों में सुंदरी प्रकार के वृक्ष प्रमुख हैं जिसकी लकड़ी टिकाऊ तथा कठोर होती है।
डेल्टा के कुछ भागों में नारियल, ताड़, क्योड़ा एवं ऐंगार के वृक्ष भी उगाए जाते हैं। ये गंगा, ब्रह्मपुत्र,
महानदी, गोदावरी, कृष्णा तथा कावेरी नदियों के डेल्टा भाग में पाए जाते हैं। रॉयल बंगाल टाइगर इन
वनों में पाया जाने वाला प्रसिद्ध जानवर है। इन वनों में बहुत से कछुए, मगरमच्छ, घड़ियाल तथा साँप
आदि भी पाए जाते हैं।
 
प्रश्न 7. कँटीले वन मैंग्रोव वनों से किस प्रकार भिन्न हैं?
उत्तर― कँटीले वन मैंग्रोव वनों से निम्न प्रकार भिन्न हैं―
 
प्रश्न 8. आर्द्र पर्णपाती वन तथा उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वनों में क्या अंतर है?
उत्तर― आई पर्णपाती वन तथा उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वनों में निम्नलिखित अंतर हैं―
                              दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
 
प्रश्न 1. भारत के वन्य जीवन पर एक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर― भारत विभिन्न प्रकार की प्राणी संपत्ति में धनी है। ऐसा उच्चावच, वर्षण तथा तापमान आदि
में भिन्नता के कारण है। भारत में वनस्पति में विविधता स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है जो कि पर्वतों,
मरुस्थलों, पठारों, नदियों आदि में गोचर होती है। हमारे देश में जीवों की 89,000 प्रजातियाँ पाई जाती
हैं। देश में 1,200 से अधिक पक्षियों की प्रजातियाँ पाई जाती हैं। यह कुल विश्व का 13 प्रतिशत है।
यहाँ मछलियों की 2,500 प्रजातियाँ हैं जो विश्व का लगभग 12 प्रतिशत है। भारत में विश्व के 5 से 8
प्रतिशत तक उभयचरी, सरीसृप तथा स्तनधारी जानवर भी पाए जाते हैं। स्तनधारी जानवरों में हाथी
सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण है। ये असम, कर्नाटक और केरल के उष्ण तथा आर्द्र वनों में पाए जाते हैं।
एक सींग वाले गैंडे अन्य जानवर हैं जो पश्चिमी बंगाल तथा असम के दलदली क्षेत्रों में रहते हैं। कच्छ
के रन तथा थार मरुस्थल जंगली गधे तथा ऊँट रहते हैं। भारतीय भैंसा, नील गाय, चौसिंघा, गैजल तथा
विभिन्न प्रजातियों वाले हिरण आदि कुछ अन्य जानवर हैं जो भारत में पाए जाते हैं। यहाँ बंदरों, बाघों
एवं शेरों की भी अनेक प्रजातियाँ पाई जाती हैं। भारतीय बाघों का प्राकृतिक वास स्थल गुजरात में गिर
जंगल है। बाघ मध्य प्रदेश तथा झारखंड के वनों, पश्चिमी बंगाल के सुंदरवन तथा हिमालयी क्षेत्रों में
पाए जाते हैं। लद्दाख की बर्फीली ऊँचाइयों में याक पाए जाते हैं जो गुच्छेदार सींगों वाला बैल जैसा जीव
है जिसका भार लगभग एक टन होता है। तिब्बतीय बारहसिंघा, भारल (नीली भेड़), जंगली भेड़ तथा
कियांग (तिब्बती जंगली गधे) भी यहाँ पाए जाते हैं। कहीं-कहीं लाल पांडा भी कुछ भागों में मिलते
हैं। नदियों, झीलों तथा समुद्री क्षेत्रों में कुछए, मगरमच्छ और घड़ियाल पाए जाते हैं।
घड़ियाल, मगरमच्छ की प्रजाति का एक ऐसा प्रतिनिधि है जो विश्व में केवल भारत में पाया जाता है।
नदियों, झीलों तथा समुद्री क्षेत्रों में कछुए, मगरमच्छ और घड़ियाल पाए जाते हैं। मोर, बतख, तोता,
सारस, पैराकीट आदि अन्य जीव हैं जो भारत के वनों तथा आर्द्र क्षेत्रों में रहते हैं।
 
प्रश्न 2. भारत में पाई जाने वाली विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों पर चर्चा कीजिए।
उत्तर― भारत में पाई जाने वाली विभिन्न प्रकार की वनस्पतियाँ-
(i) उष्णकटिबंधीय वर्षा वन/उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन―ये वन 200 सेमी या इससे
अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं। ये वन वर्ष में अलग-अलग समय पर अपने पत्ते
गिराते हैं इसलिए लगभग सदैव हरे-भरे नजर आते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि यह
क्षेत्र पूरा वर्ष गर्म तथा आर्द्र बना रहता है। इन वनों में प्रायः पाये जाने वाले पशुओं में हाथी,
बंदर, लैमूर, एक सींग वाले गैंडे और हिरण हैं। ये पश्चिमी घाट की ढलानों, लक्षद्वीप,
अंडमान-निकोबार, असम के ऊपरी भागों, तटीय तमिलनाडु, पश्चिमी बंगाल, उड़ीसा
(ओडिशा) एवं भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों में पाए जाते हैं। इन वनों में मुख्य पाये जाने वाले
वृक्षों में आबनूस, महोगनी, रोजवुड आदि हैं।
 
(ii) उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन―ये वन 70 सेमी से 200 सेमी वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्रों में
पाए जाते हैं। इनमें पाए जाने वाले वृक्ष शुष्क गार्मियों के दौरान 6 से 8 सप्ताह के लिए अपने
पत्ते गिराते हैं। जल की उपलब्धि के आधार पर इन वनों को आर्द्र पर्णपाती वनों तथा शुष्क
पर्णपाती वनों में विभाजित किया जाता है।
आर्द्र या नमपर्णपाती वन भारत के पूर्वी क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहाँ वार्षिक वर्षा 200 सेमी से
100 सेमी के बीच होती है। इन वनों में पाए जाने वाले पेड़ों में साल के वृक्ष प्रमुख हैं। शुष्क
पर्णपाती वन उन क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहाँ वार्षिक वर्षा 100 सेमी से 70 सेमी के बीच होती है।
शुष्क पर्णपाती वन प्रायद्वीपीय पठार के अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों, उत्तर प्रदेश तथा बिहार के
मैदानों में पाए जाते हैं। इन वनों में पाए जाने वाले पेड़ों में सागौन, साल, पीपल तथा नीम के
वृक्ष प्रमुख हैं।
 
(iii) कँटीले वन तथा झाड़ियाँ―ये वन उन क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहाँ 70 सेमी से कम वर्षा
होती है। इन वनों में पाई जाने वाली प्राकृतिक वनस्पति में काँटेदार वृक्ष एवं झाड़ियाँ पाई
जाती है। इस प्रकार के वन गुजरात, राजस्थान , छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश तथा
हरियाणा के अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में पाए जाते हैं। इन जंगलों में प्राय: चूहे, खरगोश, लोमड़ी,
भेड़िये, शेर, जंगली गधे, घोड़े तथा ऊँट जाए जाते हैं। अकासिया, खजूर, यूफोरबिया तथा
नागफनी यहाँ की मुख्य पादप प्रजातियाँ हैं। इन वनों के वृक्ष बिखरे हुए होते हैं। इनकी जड़ें
लंबी तथा जल की तलाश में चारों और फैली होती हैं। पत्तियाँ प्रायः छोटी होती हैं जिनसे
वाष्पीकरण कम से कम हो सके।
 
(iv) पर्वतीय वन–पर्वतीय क्षेत्रों में तापमान की कमी तथा ऊँचाई के साथ-साथ प्राकृतिक
वनस्पति में भी अंतर दिखाई देता है। वनस्पति में जिस प्रकार का अंतर हम उष्णकटिबंधीय
प्रदेशों से टुंड्रा की ओर देखते हैं उसी प्रकार का अंतर पर्वतीय भागों में ऊँचाई के साथ-साथ
देखने को मिलता है। 1,000 मी से 2,000 मी तक की ऊँचाई वाले क्षेत्रों में आई शीतोष्ण
कटिबंधीय वन पाए जाते हैं। इनमें चौड़ी पत्ती वाले ओक तथा चेस्टनट जैसे वृक्षों की
प्रधानता होती है। 1,500 से 3,000 मी की ऊँचाई के बीच शंकुधारी वृक्ष जैसे चीड़
(पाइन), देवदार, सिल्वर-फर, स्यूस, सीडर आदि पाए जाते हैं। ये वन प्रायः हिमालय की
दक्षिणी ढलानों, दक्षिण और उत्तर-पूर्व भारत के अधिक ऊँचाई वाले भागों में पाए जाते हैं।
अधिक ऊँचाई पर प्रायः शीतोष्ण कटिबंधीय घास के मैदान पाए जाते हैं। प्राय: 3,600 मी
से अधिक ऊँचाई पर शीतोष्ण कटिबंधीय वनों तथा घास के मैदानों का स्थान अल्पाइन
वनस्पति ले लेती हैं। इन वनों में प्राय: कश्मीरी महामृग, चितरा हिरण, जंगली भेड़, खरगोश,
तिब्बतीय बारहसिंघा, याक, हिम तेंदुआ, गिलहरी, रीछ, आइबैक्स, कहीं-कहीं लाल पांडा,
घने बालों वाली भेड़ तथा बकरियाँ आदि जानवर पाए जाते हैं।
 
(v) मैंग्रोव वन―मैंग्रोव एक ऐसी वनस्पति होती है जिसमें पौधों की जड़े जमीन के ऊपर होती है
तथा ये प्राय: डेल्टाई क्षेत्रों में पाए जाते हैं अथवा ज्वार भाटा वाले तटीय क्षेत्रों में यह वनस्पति
मिलती है। इन वनों में पाए जाने वाले वृक्षों में सुंदरी प्रकार के वृक्ष प्रमुख हैं जिसकी लकड़ी
टिकाऊ तथा कठोर होती है। डेल्टा के कुछ भागों में नारियल, ताड़, क्योड़ा एवं ऐंगार के वृक्ष
भी उगाए जाते हैं। ये गंगा, ब्रह्मपुत्र, महानदी, गोदावरी, कृष्णा तथा कावेरी नदियों के डेल्टा भाग
में पाए जाते हैं। रॉयल बंगाल टाइगर इन वनों में पाए जाने वाला प्रसिद्ध जानवर हैं। इन वनों में
बहुत से कछुए, मगरमच्छ, घड़ियाल तथा साँप आदि भी पाए जाते हैं।
 
प्रश्न 3. भारत में प्रयोग किए जाने वाले कुछ औषधीय पादपों का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
वे कौन-सी बीमारियों को ठीक करते हैं?
उत्तर― भारत में प्रयोग किए जाने वाले कुछ औषधीय पादप इस प्रकार हैं―
(i) सर्पगंधा―यह रक्तचाप के निदान के लिए प्रयोग होता है।
(ii) जामुन―इसके पके हुए फल से सिरका बनाया जाता है जो कि वायुसारी और मूत्रवर्धक है
और इसमें पाचनशक्ति के भी गुण हैं। बीज का बनाया हुआ पाउडर मधुमेह (Diabetes)
रोग में सहायता करता है।
(iii) अर्जुन―इसके ताजे पत्तों का निकाला हुआ रस कान के दर्द के इलाज में सहायता करता
है। यह रक्तचाप की नियमितता के लिए भी लाभदायक है।
(iv) बबूल―इसके पत्ते आँख की फुसी के लिए लाभदायक हैं। इससे प्राप्त गोंद का प्रयोग
शारीरिक शक्ति की वृद्धि के लिए होता है।
(v) नीम―जैव और जीवाणु प्रतिरोधक है।
(vi) तुलसी पादप―जुकाम और खाँसी की दवा में इसका प्रयोग होता है।
(vii) कचनार―यह फोड़ा (अल्सर) व दमा रोगों के लिए प्रयोग होता है। इस पौधे की जड़
और कली पाचनशक्ति में सहायता करती है।
 
प्रश्न 4. वनस्पति-जगत तथा प्राणी-जगत में भिन्नता के लिए जिम्मेदार कारकों पर एक
टिप्पणी लिखिए।
उत्तर― तापमान, आर्द्रता, वर्षण, भूमि एवं मृदा भारत में वनस्पति एवं वन्य-प्राणियों को प्रभावित
करने वाले प्रमुख कारक हैं।
(i) भूमि―भूमि प्राकृतिक वनस्पति को प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से प्रभावित करती है। यह
वनस्पति के प्रकार को प्रभावित करती है। उपजाऊ भूमि को कृषि के लिए प्रयोग किया जाता
है, जबकि चरागाहों एवं वन विभिन्न वन्य प्राणियों को आश्रय प्रदान करते हैं। विभिन्न प्रकार
की मृदा, विभिन्न प्रकार की वनस्पति को उगने में सहायता प्रदान करती है।
 
(ii) मरुस्थल की रेतीली जमीन कैक्टस एवं काँटेदार झाड़ियों को उगने में सहायता प्रदान करती है,
जबकि गीली, दलदली, डेल्टाई मृदा मैंग्रोव तथा डेल्टाई वनस्पति के उगने में सहायक होती है।
कम गहराई वाली पहाड़ी ढलानों की मृदा शंकुधारी वृक्षों के उगने में सहायक होती है।
 
(iii) तापमान―हवा में नमी के साथ तापमान, वर्षण तथा मृदा वनस्पति के प्रकार को निर्धारित
करते हैं। हिमालय की ढलानों तथा प्रायद्वीपीय पहाड़ियों पर उपोष्ण कटिबंधीय तथा
अल्पाइन वनस्पति पाई जाती है।
 
(iv) सूर्य का प्रकाश―किसी भी स्थान पर सूर्य के प्रकाश का समय उस स्थान के अक्षांश,
समुद्रतल से ऊँचाई एवं ऋतु पर निर्भर करता है। प्रकाश अधिक समय तक मिलने के
कारण वृक्ष, गर्मी की ऋतु में जल्दी बढ़ते हैं। लंबे समय तक सूर्य का प्रकाश पाने वाले क्षेत्रों
में गहन वनस्पति पाई जाती है।
 
(v) वर्षण―भारत में दक्षिण-पश्चिमी मानसून तथा लौटती हुई उत्तर-पूर्वी मानसून द्वारा वर्षा होती
है। भारी वर्षा वाले क्षेत्रों में कम वर्षा वाले क्षेत्रों की अपेक्षा कम गहन वनस्पति पाई जाती है।
 
मानचित्र कौशल
प्रश्न 1. भारत के मानचित्र पर निम्नलिखित दिखाएँ और अंकित करें―
(i) राष्ट्रीय उद्यान―कॉर्बेट, काजीरंगा, शिवपुरी एवं सिमलीपाल
(ii) पक्षी अभयारण्य―भरतपुर एवं रंगनाथिट्डु
(iii) वन्य जीवन अभयारण्य―सरिस्का एवं मुदुमलाई
उत्तर―
प्रश्न 2. भारत के मानचित्र में दिए गए वनों को चिह्नित कीजिए―
(i) उष्णकटिबंधीय कँटीले वन तथा झाड़ियाँ
(ii) पर्वतीय वन
(iii) मैंग्रोव वन
उत्तर―
 
                                            ■

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